क्या एक ही वकील सभी न्यायालयों में मुकदमे में पैरवी नहीं कर सकता?
क्या किसी भी प्रकार के विवाद के मामले में अपील दायर करने के लिए उच्च न्यायालय व उच्चतम न्यायालय के अलग-अलग वकील करने की आवश्कता होती है और क्या जिला न्यायालय में केस लड़ने वाला वकील ही आगे अपील दायर नहीं कर सकता है? क्या सभी वकीलों को सभी न्यायालय की कोई मेम्बरशिप लेनी होती है तब ही उस कोर्ट में अपील दायर कर सकते हैं?
उत्तर - - -
यूँ तो कोई भी वकील जो किसी भी राज्य की बार कौंसिल का सद्स्य है, उन न्यायालयों के अतिरिक्त जहाँ कानून के द्वारा वकीलों को पैरवी करने से प्रतिबंधित किया गया है,* भारत के किसी भी न्यायालय में मुकदमे की पैरवी कर सकता है। लेकिन हर वकील का अभ्यास कुछ ही न्यायालयों तक सीमित होता है। अक्सर जहाँ वह रहता है उसी स्थान के न्यायालयों में काम करता है। आवश्यकता होने पर नजदीक के न्यायालयों में पैरवी करने जाता है। लेकिन यदि आप किसी स्थानीय वकील को उच्चन्यायालय में पैरवी करने को कहें तो वह इस लिए इन्कार करता है कि वहाँ के बहुत से व्यवहार के नियमों की उसे जानकारी और अभ्यास नहीं होता। फिर वहाँ जा कर वह सहज अनुभव नहीं करता। वैसे भी व्यवहारिक यही है कि जिस अदालत में आप को मुकदमा लड़ना है उस अदालत में अक्सर अभ्यासरत वकील को ही मुकदमा दें जिस से वह सहज हो कर अपना काम मुस्तैदी से कर सके। उच्चन्यायालय तक के स्तर तक कोई भी वकील मुकदमा प्रस्तुत कर सकता है और पैरवी कर सकता है लेकिन सर्वोच्च न्यायालय में यह आवश्यक है कि आप के मुकदमे में आप को सर्वोच्च न्यायालय में किसी एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड के रूप में पंजीकृत वकील को ही अपना वकील नियुक्त करना होगा। जिस से वह न्यायालय और आप के बीच एक अच्छा माध्यम बन सके। केवल एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड ही वहाँ कोई मुकदमा या कोई भी आवेदन, दस्तावेज, जवाब आदि प्रस्तुत कर सकता है। यहाँ तक कि यदि उसी मुकदमे में आप की ओर से कोई अन्य स्थानीय वकील या सीनियर एडवोकेट भी न्यायालय के समक्ष बहस करने के लिए उपस्थित होने वाला है तो उस की सूचना अदालत को लिखित में आपका एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड ही न्यायालय को देगा। उसी के अनुसार न्यायालय में प्रवेश के लिए पास आदि बनेंगे और सूचित वकील ही सर्वोच्च न्यायालय में पैरवी कर सकते हैं।

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